भौतिक विज्ञान क्या हैं?| what is Physics in hindiभौतिक विज्ञान की परिभाषा क्या है? | Defination of physics in hindi
भौतिक विज्ञान क्या है? | What is Physics in hindi
दैनिक जीवन में होने वाली अनेक प्राकृतिक घटनाएँ जैसे मौसम का बदलना ,पत्तो का गिरना ,पक्षियों का उड़ना , वर्षा का होना, चन्द्र तथा सूर्यग्रहण आदि की व्याख्या भौतिक विज्ञान(physics in hindi) के अन्तर्गत आते है। जिसमें ब्रम्हांड में हो रहे प्राकृतिक घटनाओं का विश्लेषण किया जाता है और इन घटनाओं को समझा जाता है। भौतिक विज्ञान की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के 'fusis' से बना जिसका अर्थ "प्रकृति " होता है । भौतिकी(physics) पदार्थ और उर्जा का अध्ययन करने वाला विज्ञान है। सामान्य शब्दों में पदार्थ व ऊर्जा तथा उनके बीच संबंधों का अध्ययनों भौतिक विज्ञान(physics in hindi) कहा जाता है।
आइए हम जानते है कि भौतिक(physics) विज्ञान में दो शब्द पदार्थ तथा ऊर्जा( matter and energy) का अर्थ क्या होता है?
पदार्थ उस वस्तु को कहा जाता है जिस में वजन हो तथा स्थान घेरता हो , उसे पदार्थ(matter) कहा जाता है इसका मतलब यह हुआ कि पृथ्वी में उपस्थित वह हर वस्तु जो स्थान घेरता हो पदार्थ हैं। जिस किसी भी वस्तु में वजन नहीं होगा उसे पदार्थ नहीं कहा जा सकता है। पदार्थ को ना तो बनाया जा सकता है ना ही किसी प्रकार से नष्ट किया जा सकता है, इसे सिर्फ एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदली जा सकती है।
कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा (energy)कहते हैं, ऊर्जा के बिना कोई भी कार्य संभव नहीं है। ऊर्जा को ना तो उत्पन्न किया जा सकता है ना ही नष्ट किया जा सकता है इसे सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
भौतिकी के संदर्भ में पदार्थ तथा ऊर्जा में संबंध | The relationship between matter and energy in the context of physics in hindi
द्रब्यमान संरक्षण तथा ऊर्जा संरक्षण दो अलग-अलग नियम न होकर एक ही नियम के दो रूप हैं तथा वह नियम (द्रव्यमान + ऊर्जा) संरक्षण का नियम है अर्थात् ब्रह्माण्ड में (द्रव्यमान + ऊर्जा) का कुल परिमाण संरक्षित है। समीकरण E = mc^2 को आइन्सटीन का द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण कहते हैं। जो की सूर्य से पृथ्वी को लगातार ऊर्जा ऊष्मा के रूप में प्राप्त हो रही है जिसके फलस्वरूप सूर्य का द्रव्यमान लगातार घटता जा रहा है।
भौतिक विज्ञान की परिभाषा क्या है? | Defination of physics in hindi
भौतिक (physics in hindi) विज्ञान को अगर संक्षेप में जाने तो यह हमारे आस पास की घटित घटनाओं का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन है। जिसमे हम प्रकृति का अध्ययन करते है।
"भौतिकी ,विज्ञान की वह शाखा जिसमें प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं के भौतिक गुण और विभिन्न प्राकृतिक ऊर्जा का व्यवस्थित अध्ययन करना भौतिक विज्ञान कहलाता है।"
"विज्ञान की वह शाखा जिसमें प्रकृति तथा प्राकृतिक घटनाओं की विश्लेषण किया जाता है भौतिक विज्ञान कहलाता है।"
भौतिक विज्ञान की शाखायें | branches of physics in hindi
(1) चिरसम्मत भौतिकी (classical physics)
(2) आधुनिक भौतिकी | (modern physics)
1900 ईस्वी से पूर्व खोजे गए भौतिक नियम तथा सिद्धांत को चिरसम्मत भौतिकी (classical physics) में किया गया। इस कल में पदार्थ तथा ऊर्जा को अलग अलग रूपों में जाना जाता था । उस काल में सर आइज़क न्यूटन और जेम्स क्लार्क मैक्सवेल ने गति के नियम और गैलीलियो ने गुरुत्वाकर्षण के नियम का प्रतिपादन किया। इस काल में यांत्रिकी,ऊष्मागतिकी,विद्युत चुम्बकत्व,प्रकाशिकी,स्थिर वैद्युतिकी,ध्वनि विज्ञान/भौतिकी इत्यादि सिद्धांतो तथा नियमो का प्रतिपादन किया गया।
सन 1900 के पश्चात अनेक सिद्धांत तथा नियम प्रतिपादित हुए, जिनको चिरसाम्मत भौतिकी (classical physics) के ढाँचे में बैठाना कठिन है। इन नये तथ्यों को अध्ययन करने और उनकी समस्या के समाधान के लिए भौतिकी की जिस शाखा की उत्पत्ति हुई, उसको आधुनिक भौतिकी (modern physics) कहते हैं। आधुनिक भौतिकी(modern physics),भौतिकी की वह शाखा है जो मुख्य रूप से सापेक्षता का सिद्धांत(theory of relativity) और क्वांटम यांत्रिकी(quantum physics) से संबंधित है। अल्बर्ट आइंस्टीन और मैक्स प्लांक आधुनिक भौतिकी (modern physics)के खोजकर्ता थे। क्योंकि यही पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने सापेक्षता का सिद्धांत और क्वांटम यांत्रिकी को दुनिया के सामने लेकर आए । आधुनिक भौतिकी में ऊर्जा और पदार्थ को अलग-अलग न मानकर इन्हें एक-दूसरे का अलग अलग अर्थात सिक्के के दो पहलू के रूप माना गया। इस काल में सिद्धांतो और नियमो का प्रतिपादन 20 वी शताब्दी से अब तक लागतार होते हुए आ रही है। जैसे इलेक्ट्राॅनिक्स,परमाणु भौतिकी,नाभिकीय भौतिकी,सापेक्षिकता,क्वाण्टम यांत्रिकी/भौतिकी,भु-भौतिकी,रसायन भौतिकी,जीव भौतिकी,चिकित्सा भौतिकी,खगोलिय भौतिकी,प्लाज्मा भौतिकी,मेसोस्कोपिक भौतिकी आदि।
भौतिक विज्ञान के जन्मदाता | father of physics in hindi
भौतिक विज्ञान के जन्मदाता या भौतिक विज्ञान का जनक एक बहुत असमजस्य भरा सवाल है क्यूंकि कही पर आइजेक न्यूटन एंव कही पर गैलीलियो गैलीली एंव अल्बर्ट आइंस्टीन को भौतिकी का जनक माना गया है।
इस कारण से आज भी यह एक असमजस की स्थिति बनी हुई है।लेकिन आज भी सवाल यह उठता है के आखिर कौन है भौतिक विज्ञान का जन्मदाता।
भौतिक विज्ञान का जनक किसी एक व्यक्ति को बताना उचित नहीं होगा क्योंकि सभी महान वैज्ञानिक है और उनके प्रयोग और मेहनत का नतीजा ही है की आज भौतिक विज्ञान का प्रतिपादन हुआ है। इसीलिए इसका वर्गीकरण करते हुए कुछ विद्वानों ने निष्कर्ष निकाला है कि भौतिक विज्ञान का जनक सर आइजेक न्यूटन और आधुनिक भौतिक विज्ञान का जनक गैलीलियो गैलीली एंव अल्बर्ट आइंस्टीन को माना जा सकता है। इस प्रकार से हम भौतिक विज्ञान को जान सकते है।
भौतिकी से संबंधित महत्वपूर्ण खोज|Important discoveries related to physics in hindi
- न्यूटन -गति के नियम-1687
- कूलम्ब-स्थिरविद्युत के आकर्षण का नियम-1779
- जॉन डाल्टन-परमाणु-1808
- टाइपराइटर - क्रिस्टोफर लैथम शोल्ज/पेलेग्रीन टैरी
- ट्रांजिस्टर - विलियम शॉकले, जॉन बरडीन व वाल्टर बर्टन
- बैरोमीटर -ई. टौरसेली 1644
- रडार - रॉबर्ट वाटसन वाट स्कॉटलैण्ड 1930
- वायुयान- राइट ब्रदर्स
- फाउण्टेन पेन- लेविस वाटरमैन 1884
- ग्लाइडर - जार्ज कैले 1853
- सैफ्टी पिन -वाल्टर हंट 1849
- रबर (टायर) -थॉमस हॉनकाक 1846
- रबर (वल्कनीकृत ) -चार्ल्स गुडइयर 1841
- रिवाल्वर- सैमुअल कोल्ट 1935
- गैस इंजन -डेमलर
- सेफ्टी लैम्प -हम्फ्री डेवी 1816
- रेफ्रिजरेटर -ए. कैटलीन,हैरीसन व टिनिंग 1850
- ग्रामोफ़ोन, इलेक्ट्रिक बल्ब -थॉमस अल्वा एडीसन 1878, 1879
- डायनेमो -माइकल फैराडे 1831
- टेलीविजन (यांत्रिक)- जे.एल. बेयर्ड 1926
- लोगेरिथ्म -जॉन नेपियर 1614
- प्रोपेलर (जलयान) -फ्रांसिस स्मिथ 1837
- कम्प्यूटर -चार्ल्स बैवेज 1834
- ट्रांसफॉर्मर- माइकल फैराडे 1831
- सेफ्टी मैच -जान वाकर 1826
- कार (आंतरिक दहन ) -सैमुअल ब्राउन 1826
- रबर (जलरोधी ) -चार्ल्स मैकिनटोस 1823
- मोटरकार - हेनरी फोर्ड कार्बन पेपर -राल्फ 1806
- लोकोमोटिव (रेल ) -रिचर्ड ट्रेकिथिक 1804
- विद्युत बैटरी -अले 1800
- पैरासूट -जीन पियरे क्लानचार्ड 1795
- टेलीग्राफ- एम. लैमाण्ड 1787
- बाई-फोकल लेंस बेंजामिन फ्रेंकलिन 1780
- पनडुब्बी डेविड -बुसनेल 1776
- जे. नीप्से-धातुओं पर फोटोग्राफी-1826
- जी. एस. ओम-विद्युत प्रतिरोधकता का सिद्धांत-1827
- आर्कीमिडिज-उत्प्लावन का सिद्धांत-1827
- अल्फ्रेड नोबेल-डायनामाइट -1867
- माइकल फैराडे-विद्युत चुम्बकीय प्रेरण-1831
- डब्लू. फॉक्स टालबोट-कागज पर फोटोग्राफी-1835
- मेंडलीव-आवर्त सारणी-1888
- क्वांटम सिद्धांत-मैक्स प्लांक-1900
- रोंटजन-एक्स-किरण-1895
- इलेक्ट्रान-जे. जे. थॉमसन-1897
- हेनरी बेकरल-रेडियोसक्रियता-1896
- मैडम क्यूरी-रेडियम-1898
- मार्कोनी-बेतार का तार-1901
- आटोमोबाइल -कार्ल ब्रेंज
- टेलीफोन- ग्राहम बेल 1876
- माइक्रोफोन -ऐलेक्जेंडर ग्राहम बेल यू.एस.ए. 1876
- हैलीकॉप्टर- ए. ओहमिशेन
- आपेक्षिक घनत्व -आर्कमिडीज
- क्रेस्कोग्राफ- जे. सी. बोस 1928
- एक्स-किरणों- डब्लू. सी. रोण्टजन
- परमाणु विखंडन- रदरफोर्ड
- सेफ्टी रेजर -जिलेट
- सर जे. एस. फ्लेमिंग-डायोड बल्ब-1904
- विद्युत- पंखा व्हीलर 1776
- कार (वाष्प) -निकोलस कुगनाट 1769
- लाइटिंग-कंडक्टर बेंजामिन फ्रेंकलिन 1737
- मशीन गन- सर जेम्स पकल 1718
- थर्मस फ्लास्क- डेवार 1714
- स्टीम इंजन - धाम न्युकोमेन 1712
- प्रेशर कुकर -डेनिस पैपिन 1679
- माइक्रोमीटर -विलियम कोजीन 1636
- अलबर्ट आइन्स्टीन-सापेक्षता का सिद्धांत-1905
- अलबर्ट आइन्स्टीन-प्रकाश विद्युत प्रभाव-1905
- ताप का गतिवादी सिद्धांत- कैल्विन
- नेत्रहीनों के लिखने-पढ़ने की लिपि -लुईस ब्रेल
- रेडियो तथा वायरलेस टेलीग्राफी -जी.मारकोनी
- विद्युत् धारा तथा बैटर - वोल्टा
- पीरियोडिक टेबल - मेण्डलीफ़
- रदरफोर्ड-प्रोटॉन-1919
- ली डे फारेस्ट-ट्रायोड बल्ब -1906
- नील बोह्र और रदरफोर्ड-परमाणु संरचना-1913
- सी. वी. रमण-रमण प्रभाव-1928
- जेम्स चैडविक-न्यूट्रॉन-1932
- लिफ्ट -एलिसा ग्रेब ओटिस 1852
- नाभिकीय विखण्डन- ऑटो हॉन 1938
- नाभिकीय रिएक्टर -ई. फर्मी
- भाप का इंजन - जेम्स वाट 1769
- साइकिल- के. मैकमिलन 1839
- एनरीको फर्मी-नाभिकीय रिएक्टर-1942
- फैराडे-विद्युत-अपघटन 1941
- स्लाइड पैमाना - विलियम ओफट्रेड ब्रिटेन
- ग्रहों - केपलर 1601
- माइक्रोस्कोप- जेड. जानसेन 1590
- सौर मण्डल- कॉपरनिकस 1540
- तड़ित चालक - बेंजामिन फ्रेंकलिन
- कॉस्मिक किरणें -आर.ए. मिलीकन,विक्टर हेस
वैज्ञानिक एवं उनके द्वारा किया गया अविष्कार |Scientist and his invention
काल : सन् 476 से 550 ई. तक
खोज एवं अविष्कार : आर्यभट्ट प्राचीन भारत के सबसे महान गणितज्ञ, ज्योतिषविद एवं खगोलशास्त्री थे । विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है । उनके द्वारा की गयी खोज आधुनिक युग के वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं ।जिन्होने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन-काल उन्होने 23 घण्टा, 56 मिनट, और 4.1 सेकेण्ड निकाला था। उन्होने सूर्यग्रहण तथा चन्द्रग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या की।
निकोलस कोपरनिकस
काल : सन् 1473 से 1543 ई. तक
खोज एवं अविष्कार : निकोलस कोपर निकास एक प्रसिद्ध यूरोपिय खगोलशास्त्री व गणितज्ञ थे। उनको आधुनिक खगोल विज्ञान का संस्थापक माना जाता है। कॉपरनिकस ने ही सर्वप्रथम यह बता दिया था के पृथ्वी अंतरिक्ष के केन्द्र में नहीं है। उन्होंने यह बताया कि सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। 1530 में प्रकाशित पुस्तक डी रिवोलूशन्स में बताया कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती हुई एक दिन में अपना चक्कर पूरा करती है और एक वर्ष में सूर्य का चक्कर पूरा करती है। कोपरनिकस ने तारों की स्थिति ज्ञात करने के लिए प्रूटेनिक टेबिल्स की रचना की जो अन्य खगोलविदों के बीच काफी लोकप्रिय हुई।
गैलीलियो गैलिली
काल : 1564 से 1642 ई. तक
खोज एवं अविष्कार : गलीलियो गैलिली विश्व के अविष्कारको में से एक थे जिन्होंने अपनी गति संबंधी नियम, गुरुत्वाकर्षण एवं दूरबीन संबंधी अविष्कार के लिए पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है ।उन्होंने गीरती हुई वस्तु की समांग त्वरण दर ज्ञात किया। बृहस्पति ग्रह के चार विशाल चांद खोजे और प्रक्षेप्य गति को समझाने के लिये जाने जाते हैं।
योहानेस केप्लर
काल : 1571 से 1630 ई. तक
खोज :केप्लर एक जर्मन वैज्ञानिक थे जिन्होंने अपने जीवन को खगोलीय पिंडों के बारे में समझाने की कोशिश की। वह ग्रहों की गति के अपने तीन कानूनों के लिए सबसे प्रसिद्ध है। केप्लर ग्रहीय गति के तीन मूलभूत नियमों का सूत्रिकरण के लिए टैको ब्राहे के यथार्थ मापन का उपयोग, सूर्य के चारों ओर ग्रहों की दीर्घवर्त्तीय गति का वर्णन, दूरदर्शी का विकास, उत्तल नेत्रिका का निर्माण, लेंस की आवर्धक शक्ति का मान प्राप्त करने के लिए साधन का आविष्कार के लिए प्रसिद्ध है।
इवान गेलिस्ता टाँरीसेली
काल : सन् 1608 से 1647 तक
खोज एवं अविष्कार : इवान गेलिस्ता ने बैरोमीटर का आविष्कार किया। यह प्रति दिन पारे की ऊँचाई में परिवर्तन वायुमंडलीय दबाव में बदलाव के कारण आता है। ज्यामिति एवं समाकलन गणित के क्षेत्र में भी काम किया और 1644 में "ओपेरा जोमेट्रिका" में तरल पदार्थ और प्रक्षेप्य गति पर अपना निष्कर्ष प्रकाशित किया।
ब्लेज़ पास्कल
काल : सन् 1623 से 1662 तक
खोज एवं अविष्कार : सत्रहवीं शताब्दी के महान वैज्ञानिक ब्लेज़ पास्कल जिसने विश्व के पहले यांत्रिक कंप्यूटर या कैल्कुलेटर का आविष्कार किया था। इन्होंने तरल पदार्थों के साथ भी प्रयोग किया, 1650 के दशक में पास्कल सिद्धान्त का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार, सब तरफ से घिरे तथा असंपीड्य द्रव में किसी बिन्दु पर दाब परिवर्तित किये जाने पर, द्रव के अन्दर के प्रत्येक बिन्दु पर दाब में उतना ही परिवर्तन आता है, यह साबित किया की हवा में वजन होता है और वायु-दाब से निर्वात का उत्पादन हो सकता है, एवं दबाव की इकाई – पास्कल को अपना नाम दिया।
रॉबर्ट बॉयल
काल : सन् 1627 से 1691 तक
खोज एवं अविष्कार : रॉबर्ट बॉयल ने वैक्यूम पम्प का निर्माण किया। वो उन महान वैज्ञानिकों में थे जिनकी अभिरुचि विज्ञान की एक ही शाखा तक सीमित न होकर प्राकृतिक रसायन विज्ञान, विज्ञान और प्राकृतिक विज्ञान, भौतिकी, जल विज्ञान, चिकित्सा, पृथ्वी विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास के क्षेत्र में भी योगदान रहा। इसके भौतिकी, जल विज्ञान, चिकित्सा, पृथ्वी विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास को कवर किया. बॉयल का नियम सूत्रित किया जो आदर्श गैस के दाब और आयतन में व्युत्क्रमानुपाती सम्बंध स्थापित करता है (यदि बंद निकाय में ताप स्थिर रखा जाये) इनको आधुनिक रसायन विज्ञान के संस्थापकों में से एक माना जाता है।
क्रिश्चियन हुय्गेंस
काल : सन् 1629 से 1695 तक
खोज एवं अविष्कार : क्रिश्चियन हुय्गेंस को भौतिकी, गणित, खगोल विज्ञान और क्षितिज के क्षेत्रों में कई प्रकार के आविष्कारों और खोजों के लिए जाना जाता है।इन्होंने शनि के छल्लों पर अध्ययन किया और उसके चंद्रमा टाइटन की खोज की, लोलक घड़ी का आविष्कार किया, प्रकाशिकी और केन्द्रापसारक बल पर अध्ययन किया और यह अनुमान लगाया की प्रकाश तरंगों से बनी होती है जिससे तरंग-कण द्वैतता को समझने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाया।
रॉबर्ट हूक
काल : सन् 1635 से 1703 तक
खोज एवं अविष्कार :इन्होंने हुक नियम का प्रतिपादन किया, घड़ियों में इस्तेमाल होने वाले सर्पिल कमानी चरखे बैलेंस स्प्रिंग का आविष्कार किया, ग्रेगोरियन दूरबीन और सबसे पहले पेंच विभाजित चतुर्भाग एवं अंकगणितीय मशीन का निर्माण किया तथा कोशिका सिद्धान्त में सुधार किया।
सर आइज़क न्यूटन
काल : सन् 1642 से 1727 तक
खोज :सर आइज़क न्यूटन एक महान् गणितज्ञ, भौतिक वैज्ञानिक, ज्योतिर्विद एवं दार्शनिक थे। जब कोई भी विद्यार्थी जब विज्ञान की दुनिया में कदम रखता है तो जिस वैज्ञानिक से सबसे पहले वह परिचित होता है वह वैज्ञानिक है- सर आइज़ैक न्यूटन। इन्होंने अपनी पुस्तक फिलासफी नेचुरालिस् प्रिंसिपिया मैथेमैटिका (1687) में गति के तीन नियमों और सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्त की स्थापना की, चिरसम्मत यांत्रिकी की नींव रखी, परावर्ती दूरदर्शक का आविष्कार किया, यह खोज की कि संक्षेत्र के प्रयोग से प्रकाश को उसके संघटक वर्णक्रमीय रंगों में तोड़ा जा सकता है, शीतलीकरण नियम का प्रतिपादन किया, अत्यणुकलन का सह-आविष्कार किया।
उनके कुछ उद्धरण
"प्लेटो मेरा दोस्त है, अरस्तू मेरी दोस्त है, लेकिन मेरा सबसे अच्छा दोस्त सच्चाई है।"
"मैं स्वर्गीय निकायों की गति की गणना कर सकता हूं, लेकिन लोगों की पागलपन नहीं।"
हेनरी कैवेंडिश
काल : सन् 1731 से 1810 तक
खोज एवं अविष्कार :हेनरी कैवेंडिश एक ब्रिटिश प्राकृतिक दार्शनिक, वैज्ञानिक, और एक महत्वपूर्ण प्रायोगिक और सैद्धांतिक रसायनज्ञ और भौतिक विज्ञानी था। कैवेंडिश उसकी हाइड्रोजन की खोज के लिए विख्यात है। इन्होंने अपने खोज में वायुमण्डल की रचना पर शोध, विभिन्न गैसों के गुणधर्म, जल संश्लेषण, विद्युत आकर्षण और प्रतिकर्षण के नियम, ऊष्मा का एक यांत्रिकीय सिद्धान्त, कैवेंडिश प्रयोग में पृथ्वी के भार की गणना और सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षक स्थिरांक ज्ञात किया।
चार्ल्स ऑगस्टिन डी कूलॉम
काल : सन् 1736 से 1806 तक
खोज एवं अविष्कार : चार्ल्स ऑगस्टिन डी कूलॉम का भौतिकी के क्षेत्र में विद्युत चुम्बकत्व तथा घर्षण जैसे विषयों में काफी बड़ा योगदान रहा।
कूलम्ब द्वारा एक नियम प्रस्तुत किया जिसे कूलॉम का नियम कहते हैं। इस नियम को व्यत्क्रमानुपात के नियम के नाम से भी जानते हैं। यह नियम दो आवेशों या दो चुम्बकीय ध्रुवों के बीच लगने वाले बलों को बताता है। इस नियम के अनुसार दो विद्युत आवेशों या दो चुम्बकीय ध्रुवों के बीच लगने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल उन आवेशों या ध्रुवों की शक्ति के गुणनफल के समानुपाती होता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह नियम इन दोनों ही विषयों में बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ और सन् 1785 में एक नियम सूत्रित किया उनकी के सम्मान में विद्युत आवेश के मात्रक का नाम कूलाम रखा गया।
अलेसान्द्रो वोल्टा
काल : सन् 1745 से 1827 तक
खोज एवं अविष्कार :एलेसेंड्रो वोल्टा एक इटली के वैज्ञानिक और आविष्कारक थे। जिन्होंने वोल्टाइक ढेर के रूप में जाने वाली पहली इलेक्ट्रिक बैटरी बनाई थी। 19वीं शदी में प्रथम विद्युत बैट्री (वोल्टिल पुंज) का निर्माण किया जिसके बाद विद्युत धारा पर काम किया। उनके सम्मान में विद्युत विभव के मात्रक का नाम वोल्ट (V) रखा गया।
थॉमस यंग
काल : सन् 1773 से 1829 तक
खोज एवं अविष्कार : थॉमस यंग ब्रिटिश पॉलीमैथ थे जिन्होंने दृष्टि , प्रकाश, ठोस यांत्रिकी , ऊर्जा, शरीर विज्ञान , भाषा , संगीत सद्भाव और मिस्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया । यंग के द्वारा प्रकाश के व्यतीकरण का सिद्धान्त स्थापित किया। एक शताब्दी पुराने सिद्धान्त को पुनर्जीवित किया और इन्होंने बताया के प्रकाश की तरंग प्रकृति रखता है।
क्रिश्चियन ओर्स्टेड
काल : सन् 1777 से 1851 तक
खोज एवं अविष्कार :महान् वैज्ञानिक शोधकर्ता भौतिक शास्त्री, रसायनज्ञ, हैंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड के शोधों के कारण ही आज संपूर्ण विश्व विद्युत चुम्बकीय विचलन से परिचय हो पाया है। ओर्स्टेड ने ही सर्वप्रथम विद्युत धारा से चुम्बकीय क्षेत्र के व्युत्पन्न होने की खोज की। 19वीं शदी के अन्त में विज्ञान ने अग्रिम आकृति ली। उनके सम्मान में सीजीएस पद्धति में चुम्बकीय H-क्षेत्र की शक्ति के मात्रक का नाम ओर्स्टेड (Oe) रखा गया।
आन्द्रे मैरी एम्पीयर
काल : सन् 1777 से 1836 तक
खोज एवं अविष्कार :एक फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ थे जो शास्त्रीय विद्युत चुंबकत्व के विज्ञान के संस्थापकों में से एक थे, जिसे उन्होंने "इलेक्ट्रोडायनामिक्स" के रूप में संदर्भित किया था। उन्होंने प्रदर्शित किया कि किस तरह से विद्युत धारा से चुम्बकीय क्षेत्र व्युत्पन्न किया जाता है। उन्होंने बताया कि जब दो समानान्तर तारों में धारा प्रवाहित हो रही हो तो उनपर आपस में चुम्बकीय क्षेत्र के कारण लगने वाला बल उन तारों में बहने वाली धारा के अनुक्रमानुपाती होता है। उनके सम्मान में विद्युत धारा के मात्रक (एम्पियर) का नामकरण किया गया।
जोसेफ वॉन फ्रॉनहोफर
काल : सन् 1787 से 1826 तक
खोज एवं अविष्कार : बवेरियन भौतिक विज्ञानी और ऑप्टिकल लेंस निर्माता । उन्होंने ऑप्टिकल ग्लास और एक्ट्रोमैटिक टेलीस्कोप उद्देश्य लेंस का आविष्कार किया। सूर्य के स्पेक्ट्रम में अदिप्त रेखाओं को पढ़ने वाले प्रथम व्यक्ति, इन रेखाओं को अब फ्रॉनहोपर रेखा के नाम से जाना जाता है। बड़े पैमाने पर विवर्तन ग्रेटिंग का प्रयोग करने वाले प्रथम व्यक्ति जिससे स्पेक्ट्रोस्कोपी की नींव रखी गई और प्रकाशिय काँच तथा अवर्णक दूरबीन का निर्माण सम्भव हो पाया।
जॉर्ज ओम
काल : सन् 1789 से 1854 तक
खोज एवं अविष्कार :जॉर्ज ओम जर्मन भौतिक विज्ञानी थे। उन्होंने सैद्धांतिक रूप से कटौती की और प्रयोगात्मक रूप से एक सर्किट, वोल्टेज और प्रतिरोध (जिसे ओम के नियम के रूप में जाना जाता है) के बीच संबंध को व्यक्त करने वाले नियम की पुष्टि की।उन्होंने पाया कि किसी चालक के दोनो सीरों पर विभवान्तर (वोल्टता) V और विद्युत धारा I एक दूसरे के अनुक्रमानुपाती होते हैं तथा उन्होंने यह भी पाया कि यह धारा परिपथ के प्रतिरोध R के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात् I = V/R जिसे ओम के नियम के नाम से जाना जाता है और उनके सम्मान में विद्युत प्रतिरोध की इकाई (ओह्म) का नामकरण किया गया।
माइकल फैराडे
काल : सन् 1791 से 1867 तक
खोज एवं अविष्कार :माइकल फैराडे एक ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी, रसायनज्ञ एवं दार्शनिक थे। उन्होने विद्युत-धारा के चुम्बकीय प्रभाव का आविष्कार किया। वे विद्युत चुंबकीय प्रेरण के जन्मदाता कहे जाते हैं। फैराडे ने यह प्रदर्शित किया कि जब चुम्बकी क्षेत्र में परीवर्तन करते हैं तो यह विद्युत वाहक बल उत्पन्न करता है (फैराडे का विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का नियम)। इसी सिद्धान्त की सहायता से आज अनेकों विद्युत उपकरणों का निर्माण सम्भव हुआ।
क्रिश्चियन डॉप्लर
काल : सन् 1803 से 1853 तक
खोज एवं अविष्कार :क्रिश्चियन डॉप्लर एक ऑस्ट्रियाई गणितज्ञ तथा भौतिक विज्ञानी था। वह अपने सिद्धांत डॉपलर प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। प्रथम व्यक्ति जिन्होंने प्रकाश एवं ध्वनि तरंगों की आवृति का स्रोत अथवा प्रेक्षक की गति के साथ सम्बंध स्थापित किया। एक परिकल्पना जिसे आज डॉप्लर प्रभाव के नाम से जाना जाता है।
जेम्स प्रेस्कॉट जूल
काल : सन् 1818 से 1889 तक
खोज एवं अविष्कार : जेम्स प्रेस्कॉट जूल एक महान वैज्ञानिक, भौतिक शास्त्री, गणितज्ञ, शराब व्यापारी था। जेम्स जुल का जन्म लंदन में हुआ। ऊर्जा की इकाई जो जुल joule है , ये महान वैज्ञानिक जेम्स प्रेस्कॉट जुल के सम्मान में ही रखा गया है। जूल ने खोज की कि ऊष्मा, ऊर्जा का ही एक रूप है। इसी विचार पर ऊर्जा संरक्षण नियम का उद्भव हुआ। लॉर्ड केल्विन ने इसी आधार पर ताप के मानक पैमाने की खोज की और जूल के नियमों का आधार भी यही खोज है।
विलियम थॉमसन, बारोन केल्विन प्रथम
काल : सन् 1824 - 1907 तक
खोज एवं अविष्कार : उष्मागतिकी के इतिहास में बहुत विस्तृत योगदान रहा। ऊर्जा संरक्षण का नियम विकसित करने में योगदान दिया। तरल गतिकी में भ्रमिल गति और तरंग गति का अध्ययन किया तथा ऊष्मा के गतिकीय सिद्धान्त की व्युत्पति की। ऊष्मागतिकी के प्रथम और द्वितीय नियम की व्युत्पति की।
जेम्स क्लर्क माक्सवेल
काल : सन् 1831 से 1879 तक
खोज एवं अविष्कार :मैक्सवेल स्कॉटिश भौतिकशास्त्री व गणितज्ञ था। जिन्होंने विद्युत, चुम्बकत्व और प्रकाशिकी को वर्तमान विद्युत-चुम्बकीय सिद्धान्त में एकीकृत किया। विद्युत, चुम्बकत्व और प्रकाश को विद्युतचुम्बकीय क्षेत्र का ही रूप सिद्ध करने के लिए मैक्सवेल समीकरणों को सूत्रबद्ध किया।
अर्नस्ट मैक
काल : सन् 1838 से 1916 तक
खोज एवं अविष्कार : एक ऑस्ट्रियाई भौतिक विज्ञानी,विश्वविद्यालय के शिक्षक और दार्शनिक थे। जो सदमे तरंगों के अध्ययन जैसे भौतिकी में उनके योगदान के लिए प्रसिद्ध थे। ध्वनि की गति के अनुपात को उनके सम्मान में मैक संख्या का नाम दिया गया है। उन्होंने तार्किक वस्तुनिष्ठावाद प्रभाव, का अध्ययन किया। न्यूटन के नियमों का पुनर्रावलोकन करने के कारण उन्हें आइंस्टीन का पूर्वगामी भी कहा जाता है।
लुडविग बोल्ट्समान
काल : सन् 1844 से 1906 तक
खोज एवं अविष्कार : लुडविग बोल्ट्जमैन एक ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक था। जिसे सांख्यिकीय यांत्रिकी का जनक माना जाता था। विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान कई था। सांख्यिकीय यांत्रिकी का विकास किया (प्रमाणुओं के गुणधर्म – द्रव्यमान, आवेश और सरंचना – द्रव्य के दृश्य गुण गुणधर्म ज्ञात किये जैसे श्यानता, ऊष्मा चालकता और विसरण), गैसों की अणुगति सिद्धान्त विकसित किया।
विल्हेम कोन्राड रोन्टजेन
काल : सन् 1845 - 1923 तक
खोज एवं अविष्कार : एक महान नोबेल पुरुस्कार प्राप्त करने वाले वैज्ञानिक जिन्होने x किरण की खोज की। इन किरणों के अविष्कारक जर्मनी के प्रोफेसर रोंटजन थे। उन्होंने इनका आविष्कार सन 1895 में किया। उस समय तक इन किरणों के विषय में किसी को भी ज्ञात नही था इसलिए इनका नाम एक्स किरण रखा गया था।एक्स का अर्थ होता है अज्ञात । इन किरणों के अविष्कार के लिए रोंटजन को सन 1901 का भौतिकी का प्रथम नोबेल पुरुस्कार प्रदान किया गया था 1895 में रोंट्गन किरण अथवा एक्स-किरण तरंगदैर्घ्य परास में विद्युतचुंबकीय विकिरण निर्मित और संसूचित की। उनके सम्मान में तत्त्व 111 का नाम रोन्टजेनियम रखा गया।
हेनरी बैकेरल
काल : सन् 1852 से 1908 तक
खोज एवं अविष्कार :अंटोइन हेनरी बैकेरल एक फ्रांसीसी भौतिकशास्त्री, नोबेल पुरस्कार विजेता और मैरी क्यूरी तथा पियरे क्यूरी के साथ रेडियोधर्मिता के अविष्कारक थे। जिसके लिए तीनों को 1903 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार दिया गया। रेडियोऐक्टिवता परमाणु नाभिक का गुण है। हेनरी बेकुरेल ने पाया कि यूरेनियम तथा थोरियम लवणों से कुछ अदृश्य किरणें स्वत: उत्सर्जित होती हैं। इन अदृश्य किरणों को बेकुरेल किरणें कहा गया। बाद के अध्ययनों से पता चला कि थोरियम, पोलोनियम, ऐक्टिनियम, रेडियम आदि भी रेडियोऐक्टिव पदार्थ हैं।
हेंड्रिक लारेंज
काल : सन् 1853 से 1928 तक
खोज एवं अविष्कार : भौतिक विज्ञान में लोरेन्ट्स रूपांतरण नामकरण डच भौतिक विज्ञानी हेंड्रिक लारेंज़ के सम्मान में किया गया। यह लारेंज़ और साथियों द्वारा निर्देश तंत्र से स्वतंत्र प्रकाश का वेग प्रेक्षिण की व्याख्या करने करने का परिणाम है।प्रकाश का स्पष्ट विद्युत चुम्बकीय सिद्धान्त, ज़ीमान प्रभाव की सैद्धान्तिक व्याख्या के लिए 1902 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार पीटर ज़ीमान के साथ साझा किया। स्थानीय समय का सिद्धान्त विकसित किया और रूपांतरण समीकरणों को व्युत्पन किया जिसे बाद में दिक्-काल का वर्णन करने के लिए अल्बर्ट आइंस्टीन के काम में लिया।
जे जे थॉमसन
काल : सन् 1856 से 1940 तक
खोज एवं अविष्कार : सर जोसेफ जॉन थॉमसन एक ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी और भौतिकी में नोबेल पुरस्कार विजेता थे। जिन्हें इलेक्ट्रॉन की खोज का श्रेय दिया जाता है। जो खोजा जाने वाला पहला उप-परमाणु कण है। 1897 में कैथोड किरणें की खोज की जो उससे पहले ऋणावेशित अज्ञात अज्ञात कण के रूप में जाने जाते थे बाद में इन्हें इलेक्ट्रॉन नाम दिया गया। समस्थानिकों की खोज की। द्रव्यमान स्पेक्ट्रममापी का आविष्कार किया। इलेक्ट्रॉन की खोज और गैसों में विद्युत चालकता पर कार्य के लिए उन्हें 1906 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
निकोला टेस्ला
काल : सन् 1856 से 1943 तक
खोज एवं अविष्कार : निकोला टेस्ला उन महान वैज्ञानिकों में से एक थे। जिन्होंने दुनिया को ऐसे-ऐसे आविष्कार दिए जिनका इस्तेमाल आज हम रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं। टेस्ला को एक रहस्यमय वैज्ञानिक भी माना जाता है। कहते हैं उन्होंने समय यात्रा की थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने खुद कहा था कि उन्होंने भूतकाल, वर्तमान और भविष्य तीनों को एक साथ देखा है। इससे संबंधित उन्होंने एक किताब भी लिखी थी। निकोला टेस्ला एक आविष्कारक, मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और फिज़िकल इंजीनियर थे। उन्होंने आधुनिक प्रत्यावर्ती धारा (AC) प्रवाह को विकसित किया। तार-रहित संचार आधारित उपकरणों, रेडियो, ट्रांसफार्मर और विद्युत बल्ब के लिए डायनेमो का सैद्धान्तिक निर्माण किया। टेसला कुण्डली का आविष्कार किया।
हाइनरिख़ हर्ट्ज़
काल : सन् 1857 से 1894 तक
खोज एवं अविष्कार : हाइनरिख़ रूडॉल्फ़ हर्ट्ज़ एक जर्मन भौतिक विज्ञानी थे। जिन्होंने जेम्स क्लर्क माक्सवेल द्वारा खोजे गए प्रकाश के मूल विद्युतचुम्बकीय विकिरण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की तरंगों के सिद्धांत को और आगे विकसित किया। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने प्रयोगशाला में रेडियो की तरंगों को प्रसारित करने और पकड़ने के यंत्र बनाये। उनके इस महत्वपूर्ण काम के लिए रडियो की आवृत्ति के माप का नाम “हर्ट्ज़” (Hertz) रखा गया जिसे छोटे रूप में “Hz” लिखा जाता है।
मैक्स प्लांक
काल : सन् 1858 से 1947 तक
खोज एवं अविष्कार : मैक्स प्लांक एक जर्मन वैज्ञानिक था जिन्होने सन् 1900 में क्वांटम यांत्रिकी की स्थापना की। फोटोन की ऊर्जा का इसकी आवृति के अनुक्रमानुपाती होना प्रदर्शित किया। इसके लिए उन्हें 1918 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया।
पीटर ज़ीमान
काल : सन् 1865 से 1943 तक
खोज एवं अविष्कार : पीटर ज़ीमान डच भौतिक वैज्ञानिक थे। भौतिकी की महत्वपूर्ण खोज जीमन प्रभाव सन् 1896 में की थी जिसके लिये इन्हें सन 1902 के भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। जीमान प्रभाव वर्णक्रम रेखाओं का चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति में विभिन्न घटकों में विपाटित होना की खोज के लिए 1902 का नोबेल पुरस्कार हेंड्रिक लारेंज़ के साथ साझा किया।
मेरी क्युरी
काल : सन् 1867 से 1934 तक
खोज एवं अविष्कार :मैरी क्यूरी एक पॉलिश वैज्ञानिक और एकमात्र वैज्ञानिक थे। जिन्होंने दो विषयों में नोबेल पुरस्कार जीता था। वह अक्सर विज्ञान में सबसे प्रेरणादायक महिला के रूप में वर्णित है वह कई सालों से रेडियोधर्मिता की प्रकृति के बारे में अविश्वसनीय खोजों को बना रहा और दो तत्वों, पोलोनियम और रेडियम की खोज की। हेनरी बैकेरल और अपने पति पियरे क्यूरी के साथ मिलकर रेडिओधर्मिता की खोज की। इन्हें दो बार नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1903में भौतिकी में एवं 1911 में रसायनशास्त्र में।
अर्नेस्ट रदरफोर्ड
काल : सन् 1871 से 1937 तक
खोज एवं अविष्कार :अर्नेस्ट रदरफोर्ड न्यूजीलैंड के एक वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियोधर्मिता और परमाणु की संरचना में अपने अध्ययन के माध्यम से भौतिकी और रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महान योगदान दिया। इन्हें "नाभिकीय भौतिकी के पिता" कहा जाता है, उन्होंने प्रदर्शित किया की परमाणु नाभिक धनावेशित होता है, कृत्रिम नाभिकीय अभिक्रिया की सहायता से तत्त्व को अन्य में बदलने वाले प्रथम व्यक्ति थे। एल्फा और बीटा किरणों को विभेदित किया। 1908 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित।
अल्बर्ट आइंस्टीन
काल : सन् 1879 से 1955 तक
खोज एवं अविष्कार : अल्बर्ट आइंस्टीन जर्मनी के एक महान वैज्ञानिक थे।उनके विशिष्ट और सामान्य आपेक्षिकता सिद्धान्त ने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में क्रान्ति ला दी और ब्राउनी गति का वर्णन किया। प्रकाश विद्युत प्रभाव पर उनके कार्य के लिए उन्हें 1921 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मीला। इन्होने द्रव्यामान ऊर्जा सम्बंध सूत्र E = mc2 दिया। इनको "आधुनिक भौतिकी के पिता" माने जाते हैं।
नील्स बोर
काल : सन् 1885 से 1962 तक
खोज एवं अविष्कार : नील्स हेनरिक डेविड बोर डेनमार्क के एक महान वैज्ञानिक थे। वर्ष 1913 में नील्स बोर द्वारा रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की त्रुटियों को दूर करते हुए तथा प्लांक के क्वाण्टम सिद्धांत की सहायता से अपना परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया।परमाणु के प्रमात्रा यान्त्रिकीय मॉडल (जिसे अब बोर मॉडल के नाम से जाना जाता है।) को काम में लिया और उसकी व्याख्या की कि इलेक्ट्रोन नाभिक के चारों ओर विविक्त कक्षाओं में गति करते हैं, इलेक्ट्रॉन के ऊर्जा स्तरों और वर्णक्रम रेखाओं से सम्बंध स्थापित किया। 1922 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार जीता।
अर्विन श्रोडिन्गर
काल : सन् 1887 से 1961 तक
खोज एवं अविष्कार : अर्विन श्रोडिन्गर विख्यात वैज्ञानिक था। उसने क्वांटम मेकानिक्स की नींव डाली।भौतिक निकाय की क्वांटम अवस्था में समय के साथ परिवर्तन की व्याख्या करते हुये 1926 में श्रोडिंगर समीकरण को सूत्रित किया, 1933 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया और इसके दो वर्ष बाद श्रोडिगर कैट नामक प्रयोग का विचार प्रस्तुत किया।
ऍडविन हबल
काल : सन् 1889 से 1953 तक
खोज एवं अविष्कार : ऍडविन पावल हबल एक अमेरिकी खगोलशास्त्री थे। जिन्होनें हमारी गैलेक्सी (आकाशगंगा या मिल्की वे) के अलावा अन्य गैलेक्सियाँ खोज कर हमेशा के लिए मानवजाती की ब्रह्माण्ड के बारे में अवधारणा बदल डाली। आकाशगंगा के अलावा भी गैलेक्सियाँ होने और गैलेटिक अभिरक्त विस्थापन की खोज की। अन्य पृथ्वी से किसी विशिष्ट दूरी पर स्थित आकाशगंगाओं के दूर जाने के कारण उनसे आने वाले प्रकाश के वर्णक्रम की आवृति में कमी को अभिरक्त विस्थापन द्वारा समझाया जिसे अब हबल का नियम नाम से जाना जाता है।
लुई द ब्रॉई
काल : सन् 1892 से 1987 तक
खोज एवं अविष्कार : फ़्रांसिसी वैज्ञानिक लुई द ब्रॉई क्वांटम सिद्धांत पर शोध कार्य किया। इलेक्ट्रॉन में तरंग प्रकृति की खोज की। 1929 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कणों की तरंग सदृश प्रकृति पर उनके विचारों का इस्तेमाल अर्विन श्रोडिन्गर ने तरंग यांत्रिकी के सूत्रीकरण में किया।
सत्येन्द्रनाथ बोस
काल : सन् 1894 से 1974 तक
खोज एवं अविष्कार : सत्येंद्र नाथ बोस एक गणितीय भौतिकी के विशेषज्ञ और भारतीय भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर सत्येन्द्र नाथ बोस का जन्म कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुआ था। उन्हें 1920 के दशक में प्रमात्रा यान्त्रिकी पर अपने काम के लिए जाना जाता है। जिसने बोस-आइन्स्टाइन सांख्यिकी और बोस-आइंस्टीन संघनन के सिद्धांत की नींव रखी। बोस-आइन्स्टाइन सांख्यिकी का पालन करने वाले कणों को (बोसॉन) पॉल डिराक द्वारा उनका नाम दिया गया है।
पीटर कपिज़ा
काल : सन् 1894 से 1994 तक
खोज एवं अविष्कार : पीटरकपीजा एक रूसी वैज्ञानिक थे। वर्ष 1934 में द्रव हीलियम बनाने के लिए (रुद्धोष्म सिद्धान्त पर आधारित) एक उपकरण विकसित किया जिससे बाद में 1937 में अति तरलता की खोज सम्भव हुई। उन्हें 1978 में "निम्न ताप भौतिकी के क्षेत्र में कार्य के लिए" आर्नो पेन्जियस और रोबर्ट वूड्रो विल्सन के साथ भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वुल्फगांग पौली
काल : सन् 1900 से 1958 तक
खोज एवं अविष्कार :वुल्फगांग पौली एक एस्ट्रिया के क्वांटम भौतिकी के एक अग्रणी वैज्ञानिक थे। 1945 का भौतिकी में नोबेल पुरस्कार जीता (अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा नामांकित), प्रचक्रण सिद्धान्त सहित पाउली अपवर्जन नियम को सूत्रबद्ध किया (पदार्थ की बनावट का आधार), पाउली–विलर्स नियमितीकरण प्रकाशित किया तथा पाउली समीकरण को सूत्रित किया।
वर्नर हाइजनबर्ग
काल : सन् 1901 से 1976 तक
खोज एवं अविष्कार : वर्नर हाइजेनबर्ग एक जर्मन भौतिक विज्ञानी थे जो क्वांटम यांत्रिकी के सबसे महत्वपूर्ण अग्रदूतों में से एक थे और उन्होंने 1 9 32 में नोबेल पुरस्कार जीता। सन् 1925 में क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धान्तों को आव्युह के पदों में समझाने की विधि विकसित की। 1927 में प्रसिद्ध अनिश्चितता सिद्धान्त प्रकाशित किया।
एन्रीको फर्मी
काल : सन् 1901 से 1954 तक
खोज एवं अविष्कार : एन्रीको फर्मी एक इटैलियन भौतिक विज्ञानी एवं नोबेल पुरस्कार विजेता थे। प्रथम नाभिकीय रिऐक्टर विकसित किया। क्वांटम सिद्धान्त में योगदान, नाभिकीय और कण भौतिकी तथा सांख्यिकीय यांत्रिकी के क्षेत्र में योगदान दिया। कृत्रिम रेडियोऐक्टिवता पर कार्य के लिए प्राइज़ इन फीजिक्स से सम्मनित भी हुए।
पॉल डिरॅक
काल : सन् 1902 से 1984 तक
खोज एवं अविष्कार :पॉल एड्रियन मौरिस डिरॅक एक अंग्रेज़ सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री थे जिन्होंने क्वांटम यांत्रिकी और क्वांटम विद्युत गतिकी दोनों के प्रारंभिक विकास के लिए मौलिक योगदान दिया था। प्रमात्रा यांत्रिकी और प्रमात्रा विद्युतगतिकी के प्रारम्भिक विकास में आधारभूत योगदान दिया, फर्मिऑनों के व्यवहार को समझाने के लिए डिरैक समीकरण को सूत्रबद्ध किया, प्रतिद्रव्य की उपस्थिति को प्रागुक्त किया, 1933 में अर्विन श्रोडिन्गर के साथ भौतिकी का नोबेल पुरस्कार जीता।
जॉन बर्दीन
काल : सन् 1908 से 1991 तक
खोज एवं अविष्कार : जॉन बर्दीन जॉन बर्दीन एक अमेरिकी भौतिक वैज्ञानिक थे। जिन्होने ट्रान्जिस्टर की खोज के लिए विलियम शोक्ली और वॉल्टर ब्रैट्टैन के साथ 1956 का नोबेल पुरस्कार जीता और बाद में पुनः बीसीएस सिद्धान्त के नाम से जानी जाने वाली सांकेतिक अतिचालकता के लिए मूलभूत सिद्धान्त देने के लिए 1972 में लीयों नील कूपर और जॉन रॉबर्ट श्रीफर के साथ नोबेल पुरस्कार जीता।
जॉन व्हीलर
काल : सन् 1911 से 2008 तक
खोज एवं अविष्कार : 1967 में पहली बार खगोलविद जॉन व्हीलर ने “ब्लैक होल” शब्द का इस्तेमाल किया था।द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका में आपेक्षिकता के सामान्य सिद्धान्त को पुनर्जीवित किया। नाभिकीय विखण्डन के सिद्धान्तों की व्याख्या करने के लिए नील्स बोर के साथ काम किया।आइंस्टीन के स्वप्न 'एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत' को प्राप्त करने की कोशिश की।
हेनरी वे केंडल
काल : सन् 1926 से 1999 तक
खोज एवं अविष्कार : हेनरी वे केंडल एक अमेरिकी कण भौतिक विज्ञानी थे। जिन्होंने जेरोम आइज़क फ्राइडमैन और रिचार्ड इ टेलर के साथ 1990 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार जीता। उन्हें यह पुरस्कार प्रोटोनों और परिबंध न्यूट्रोनों पर इलेक्ट्रॉनों की प्रबल अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन के विषय में अग्रणी अन्वेष्ण के लिए मिला जिससे कण भौतिकी के क्वार्क मॉडल की खोज में एक आवश्यक महत्त्व रखता है।
हमारे दैनिक जीवन में भौतिकी और इसका महत्व |Physics and its importance in our daily life in hindi
हमारे दैनिक जीवन में भौतिकी की भूमिका अतिमहत्वपूर्ण है हम जीवन भर भौतिकी(physics in hindi) विज्ञान से घिरे हुए रहते है। सोना,उठना,चलना,खेलना,नहाना,खाना,पीना, दौड़ना, कूदना इत्यादि सभी कार्य भौतिक विज्ञान से संबंधित होता है।
- चिकित्सा के क्षेत्र में सोनोग्राफी, एम.आर.आई. मशीन, एक्स-रे आदि का निर्माण भौतिक विज्ञान की ही देन है।
- विद्युत ऊर्जा का उत्पादन नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया द्वारा होता है। यह भी भौतिक विज्ञान की देन है।
- घरों में विद्युत द्वारा प्रकाश की व्यवस्था मनोरंजन की व्यवस्था सभी भौतिक विज्ञान की देन है।
- रासायनिक विज्ञान के क्षेत्र में रासायनिक दवाइयों के निर्माण हेतु प्रयुक्त मशीने भौतिक विज्ञान की ही देन है।
- बड़े बड़े विद्युत उपकरणों ,विद्युत गृह, पावरस्टेशन,मोबाइल,सिग्नल टॉवर इत्यादि भौतिकी विज्ञान है।
- कम्प्यूटर हमारे लिए बहुत अधिक उपयोगी हैं इसकी सहायता से जटिल गणनाओं को आसानी से हल किया जा सकता हैं भौतिक विज्ञान की देन है।
- राॅकेट के नोधन में न्यूटन की गति का द्वितीय व तृतीय नियम के उपयोग में भौतिक विज्ञान है।
- आवागमन के साधनों के कारण विभिन्न देशों तथा प्रदेशों के लोगों का आना जाना सुगम हो गया है।
- किसी वाहन की गति के निर्धारण के लिए न्यूटन की गति का द्वितीय व तृतीय नियम भी भौतिकी से संबंधित है।
- वायुयान की गति के लिए बरनूली/बरनोली के सिद्धान्त का उपयोग भौतिक विज्ञान से संबंधित है।
- गणित के क्षेत्र में दिये गये सिद्धान्त प्रमेय आदि का सत्यापन अर्थात् सूत्र भौतिक विज्ञान से संबंधित है।आदि
- भौतिकी एक ऐसा विषय है जो लोगों को काफी प्रेरित करता है इससे प्रकृति को समझने और उसके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए लोगों को उत्साहित करता है।
- विज्ञान इसी शाखा की वजह से आज हम रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने में सफल हो सके हैं और हवाई जहाज की मदद से हम एक जगह से दूसरे लोग बस कुछ घंटे में ही चले जाते हैं।
- आज हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ऊंची – ऊंची इमारतों को बनते हुए देखते हैं जिसमें इस विज्ञान के नियम को हम झुठला नहीं सकते क्योंकि ऊंची इमारतों को प्रकृति द्वारा होने वाले विपदाओं से बचाने के लिए इसके नियमों के अधीन निर्माण कार्य को किया जाता है। यानी कि तूफान, भूकंप इत्यादि के आने पर ऊंची इमारतें किस तरह से सुरक्षित हो सकती हैं इसके लिए भौतिकी विज्ञान को ही आधार माना जाता है।
- रसायन विज्ञान, इंजीनियरों, कंप्यूटर वैज्ञानिकों कि शिक्षा के साथ साथ बायोमेडिकल और इस विज्ञान के चिकित्सकों के लिए ये विषय एक महत्वपूर्ण है।
- इस विज्ञान के सहारे हमारी दैनिक जीवन में काफी सुधार हुआ है।इसका अनुप्रयोग मेडिकल एप्लीकेशन, जैसे अल्ट्रासोनिक, लेजर सर्जरी इत्यादि में किया जाता है।
- रेडियो और टेलीविजन की खोज ने यह संभव कर दिया है कि हमारे चारों ओर संसार के किसी भी कोने में हो रही घटनाओं को हम सुन और देख सकते है।
- टेलीविजन, मोबाइल, टेलीप्रिंटर की सहायता से विश्व के दूरस्थ भागों में भी संदेशों का आदान-पद्रान पल भर में हो जाता हैं।
भौतिक विज्ञान के विकास के कारण ही आज जीवन आसान व सुविधाजनक हो गया है।
संक्षेप में |conclusion
भौतिक विज्ञान क्या है ? (What is Physics in hindi)विज्ञान का हमारे जीवन में क्या महत्व है ? आशा करते है की आज अपने भौतिक विज्ञान की बहुत सारी बाते को सीख लिया। इसी प्रकार का लेख और विज्ञान की जानकारी आपके तक पहुंचाना हमारा उद्देश्य है।ताकि हर घर में एक वैज्ञानिक हो।
कृपया पाठकगण आप सभी से निवेदन है की (physics in hindi)इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अधिक से अधिक शेयर करें।
धन्यवाद!

दैनिक जीवन में भौतिकी

" एक कदम विज्ञान की ओर "
विज्ञान के कुछ आश्चर्यजनक और रोचक बातें| Amazing and interesting facts of science in hindi
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Good information
जवाब देंहटाएंThnks yr
हटाएंWahhh sirrr 🙏🙏🙏🙏
जवाब देंहटाएंThanku sir ji
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