प्लास्टिक प्रदूषण और कचरा प्रबंधन क्या है?|what is Plastic pollution and waste management in hindi
क्या आप प्लास्टिक प्रदूषण और कचरा प्रंबधन के बारे में जानते है? अगर नही, तो आइए आज हम जानेंगे कि इसका अर्थ क्या है ?,इसके कितने प्रकार है?प्लास्टिक प्रदूषण क्या है?,इसके कारण क्या है?, इसके प्रभाव क्या है?,और इसके समाधान क्या हैं?What is the meaning of plastic in hindi ?,How many types of plastic are there in hindi ?,What is plastic pollution in hindi ?,What is the cause of plastic pollution in hindi ?,What are the effects of plastic pollution in hindi ?,what are the solutions of plastic pollution in hindi? आज हम प्लास्टिक द्वारा हमारे पर्यावरण में होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में कुछ जानकारी प्राप्त करेंगे क्या आप जानते है कि हर साल 29 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक प्लास्टिक पर्यावरण में प्रवेश करता है, हमारे भारत देश में 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिदिन 15000 टन प्लास्टिक अपशिष्ट निकलता है. जो कि दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व में इतना प्लास्टिक हो गया है कि इस प्लास्टिक से पृथ्वी को 5 बार लपेटा जा सकता है। पर्यावरण को सबसे अधिक आधुनिक युग में सुविधाओं के विस्तार ने ही चोट पहुँचाई है।लेकिन अब यही प्लास्टिक मानव के जीवन के साथ – साथ पृथ्वी के वातावरण के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। मनुष्यों की सुविधा के लिए बनाई गयी पॉलीथीन सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है। इनको जलाने से निकलने वाला धुआँ ओज़ोन परत को भी नुकसान पहुँचाता है जो ग्लोबल वार्मिग का बड़ा कारण है। देश में प्रतिवर्ष लाखों पशु-पक्षी पॉलीथीन के कचरे से मर रहे हैं। इससे लोगों में कई प्रकार की बीमारियाँ फैल रही हैं। इससे ज़मीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है तथा भूगर्भीय जलस्रोत दूषित हो रहे हैं। पॉलीथीन कचरा जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सीन्स जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारियाँ होने की आशंका बढ़ जाती है। इस प्रकार से बढ़ती प्लास्टिक की कचरा जहां से यह जानवरों को नुकसान पहुंचता है साथ ही आवासों को भी नुकसान पहुंचता है। इसके निपटान के लिए पूरे विश्व में नए नए तकनीकों का आविष्कार जारी है और कई जगहों के कचरा प्रबंधन द्वारा इसको रोकने की कोशिश की जा रही है। ठीक इसी विषय पर प्यू चैरिटेबल ट्रस्ट्स के शोधकर्ताओं और 23 जुलाई को साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि मौजूदा अपशिष्ट प्रबंधन और रीसाइक्लिंग तकनीक का उपयोग करके अगले 20 वर्षों में इस प्रवाह को लगभग 80% तक कम किया जा सकता है।
इसमें प्लास्टिक के दुष्प्रभाव की कमी को प्राप्त करने के लिए, देश प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन दो प्रकार से करते हैं - अपस्ट्रीम (उत्पादन और डिजाइन) और डाउनस्ट्रीम (उपयोग और निपटान) दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव की आवश्यकता है। इस परिवर्तनों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करना, जहां संभव हो प्लास्टिक को प्रतिस्थापित करना, रीसाइक्लिंग रणनीतियों में सुधार करना, अपशिष्ट संग्रह का विस्तार करना और बेहतर निपटान सुविधाओं का निर्माण करना शामिल है।
हालांकि, तत्काल और ठोस कार्रवाई के बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि 2016 और 2040 के बीच 710 मिलियन मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा जलीय और स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र में प्रवेश करेगा।
प्यू के द्वारा जो शोध की जा रही है उसमे महासागर प्लास्टिक परियोजना के एक वरिष्ठ अधिकारी और अध्ययन के प्रमुख लेखक विनी लाउ ने कहा, "हालांकि प्रौद्योगिकी प्लास्टिक कचरे की चुनौती को संबोधित करने के लिए मौजूद है, बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक प्रक्रियाएं अभी तक नहीं हैं।" "इससे पहले कि हम वास्तविक परिवर्तन देख सकें, संग्रह के बुनियादी ढांचे, प्लास्टिक के विकल्प और रीसाइक्लिंग सुविधाओं में पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।"
आज की चर्चा के अनुसार प्लास्टिक देश की सबसे बड़ी समस्या है। इसका प्रबंधन देश की सबसे बड़ी चुनौती है। आइए हम प्लास्टिक के बारे में कुछ जानते है कि इसका अर्थ क्या है ?,इसके कितने प्रकार है?प्लास्टिक प्रदूषण क्या है?,इसके कारण क्या है?, इसके प्रभाव क्या है?,और इसके समाधान क्या हैं? What is the meaning of plastic in hindi ?,How many types of plastic are there in hindi ?,What is plastic pollution in hindi ?,What is the cause of plastic pollution in hindi ?,What are the effects of plastic pollution in hindi ?,what are the solutions of plastic pollution in hindi? आइए हम एक एक करके जानते है कि
प्लास्टिक क्या है? |what's Plastic in Hindi?
प्लास्टिक एक कृत्रिम पॉलिमर है। पॉलिमर यह अणुओं का भार है जो कई मोनोमर के शृंखला से बना हुआ हैं ।
पॉलिमर के दो प्रकार है।
(1)प्राकृतिक
(2)मानवीयकृत
प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जिसे आसानी से बनाया तथा वांछित रूप में ढाला जा सकता है। इसे यांत्रिक बल और गर्मी के द्वारा से प्लास्टिक को एक वांछित आकार में बनाया जा सकता है। पेट्रोलियम, सेल्यूलोज, सल्फर जैसे प्लास्टिक के कच्चे माल के निर्माण में चूना पत्थर, हवा, पानी आदि का उपयोग किया जाता है।
प्लास्टिक के प्रकार कितने है?| How many types of plastic in hindi?
(1) थर्माप्लास्टिक
(2)थर्मोसेटिंग
एक वस्तु के रूप में दुनिया भर के बड़े पैमाने पर प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। मूल रूप से यह एक कृत्रिम पॉलीमर है। जिसमें कई कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ होते हैं, और जो ज्यादातर पेट्रोकेमिकल्स से प्राप्त होते हैं।
प्लास्टिक प्रदुषण क्या है?| what's Plastic Pollution in Hindi?
जब पृथ्वी में प्लास्टिक कही पर एक जगह में जमा होने लगता है तो इसके इकट्ठा होने के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानव और जीव-जंतुओं पर इसका प्रभाव नकारात्मक पड़ने लगता है तो इसे प्लास्टिक प्रदुषण कहा जाता है। प्लास्टिक प्रदुषण सभी प्रकार के प्रदुषण को बढ़ावा देता है। यह मुख्य रूप से मृदा प्रदुषण, जल प्रदुषण और वायु प्रदुषण को बढ़ावा देता है।
प्लास्टिक प्रदूषण के क्या कारण है?|What is the cause of plastic pollution in hindi?
प्लास्टिक निर्मित सामान गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की जिंदगी को सरल और आसान बनाने में सहायक होते हैं। लेकिन वे इसके लगातार उपयोग से उत्पन्न खतरे से अनजान हैं। प्लास्टिक एक ऐसी वस्तु है जो पूजा, रसोईघर, बाथरूम, बैठक कमरे और पढ़ने के कमरे में भरपूर उपयोग होने लगा है। इतना ही नहीं अगर हमें बाजार से राशन, फलों, सब्जियां, कपड़े, जूते, दूध, दही, तेल, घी और फलों का रस आदि जैसे किसी भी वस्तु को लेकर आना पड़े तो पॉलीथीन का बहुताय: रूप से उपयोग किया जाता है। आज की दुनिया में सारे फास्ट फूड पॉलिथीन में ही पैक किया जाता है। आदमी इतना प्लास्टिक का आदी बन गया है कि वह जूट या कपड़े से बने बैग का उपयोग करना भूल गया है। दुकानदार भी हर प्रकार के पॉलिथीन बैग रखते हैं क्योंकि ग्राहक ने पॉली को रखना अनिवार्य बना दिया है। ऐसा पहले जमाने में नहीं था उस समय बैग कपड़े, जूट या कागज से बने बैग इस्तेमाल में लाये जाते थे जो पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा था।
प्लास्टिक प्रदूषण का पर्यावरण पर क्या प्रभाव है?|What is the impact of plastic pollution on the environment in hindi?
प्लास्टिक प्रदूषण पर्यावरण के लिए एक गंभीर समस्या है। वैज्ञानिक ने इसके होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में चेतावनी देते आ रहे हैं। यह समस्या विशेष रूप से गंभीर विषय है क्योंकि विभिन्न प्रचारित स्वच्छता अभियान के बावजूद प्लास्टिक कचरे से कुछ भी अछूता नहीं रहा है। इसने गांवों, कस्बों, शहरों, महानगरों यहां तक कि देश की राजधानी को भी नहीं छोड़ा है। इस संबंध में राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बार-बार अपनी नाराजगी और असंतोष व्यक्त की है। उसने राज्य सरकारों को पूरे देश में प्लास्टिक के अंधाधुंध उपयोग पर पाबंदी लगाई है। इस समस्या के बारे में जाने तो
अनुसंधान से पता चला है कि वन्यजीवों पर प्लास्टिक प्रदूषण के नकारात्मक प्रभावों को दिखा रहा है। यह ज्ञात है कि इस प्रदूषण से 800 से अधिक प्रजातियों को नुकसान हुआ है, या तो अंतर्ग्रहण या उलझने से मनुष्य भी प्रभावित होते हैं। पीने की बोतलें और अन्य प्लास्टिक कचरा समुद्र तट, नालियों और अन्य अपशिष्ट जल प्रणालियों को अवरुद्ध करता है, और रोग वैक्टर के लिए प्रजनन स्थल प्रदान करता है। मछली पकड़ने, पर्यटन और शिपिंग पर प्लास्टिक प्रदूषण की संयुक्त आर्थिक लागत कम से कम $13 बिलियन सालाना होने का अनुमान है।
पिछले कुछ दशकों में प्लास्टिक प्रदूषण में तेजी से वृद्धि एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक की खपत में वृद्धि और एक बढ़ती हुई संस्कृति के कारण हुई है। इसके अलावा, विश्व स्तर पर अधिकांश अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट प्लास्टिक की मात्रा को सुरक्षित रूप से निपटाने या पुनर्चक्रण करने की क्षमता का अभाव है।
क्योंकि प्लास्टिक इतना सर्वव्यापी है, इस प्रदूषण को दूर करने के लिए कोई एक वैश्विक रणनीति मौजूद नहीं है। प्लास्टिक के प्रकारों की विविधता भी समस्या को प्रभावी ढंग से संबोधित करना मुश्किल बनाती है। हालांकि कठोर प्लास्टिक रीसाइक्लिंग पुनर्चक्रण पर हावी है, अन्य रणनीतियों का उपयोग करके लचीले और बहु-सामग्री प्लास्टिक कचरे से निपटना चाहिए।
प्लास्टिक,वायु प्रदूषण में क्यों हानिकारक हैं?|Why plastics are harmful in air pollution in hindi?
प्लास्टिक अपशिष्ट कई जहरीली गैसों का उत्पादन करता है। जिससे गंभीर वायु प्रदूषण (Air Pollution) होता है जो कैंसर जैसी बीमारी को बढ़ावा देता है, शारीरिक विकास को बाधित करता है और भयंकर बीमारी का कारण बनता है। प्लास्टिक को बनाने के दौरान एथिलीन ऑक्साइड, बेंजीन और जाईलीन जैसी खतरनाक गैसें उत्पन्न होती हैं। डाईऑक्सीन (Dioxin) नामक गैस भी इसे जलाने पर बनता है जो बहुत ही जहरीला है और कैंसर (Cancer) जैसा रोग पैदा करने वाला तत्व है।
गड्ढों में प्लास्टिक के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है, मिट्टी और भूजल विषाक्त हो जाते हैं और धीरे-धीरे पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ना शुरू हो जाता है। प्लास्टिक उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य (Health),विशेष रूप से उनके फेफड़े (Lungs), किडनी और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है।
प्लास्टिक प्रदूषण का समाधान किस प्रकार किया जा सकता है?|How can plastic pollution be solved in hindi ?
यह समाज का कर्तव्य है कि वे इस वाक्य को सही साबित करें कि प्रकृति भगवान का अनोखा उपहार है। इसलिए लोगों को पॉलीथीन की वजह से होने वाले प्रदूषण (Pollution) को रोकने के लिए आगे आना होगा और हर किसी को अपने स्तर पर इसके निपटान करने में शामिल होना होगा। चाहे वह बच्चा हो या बुजुर्ग, शिक्षित हो या अशिक्षित, समृद्ध हो या गरीब, शहरी हो या ग्रामीण सभी को प्लास्टिक के खतरे से छुटकारा पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। परिवार के पुराने सदस्यों को पॉलीथीन का उपयोग नहीं करना चाहिए और अन्य सभी सदस्यों को इसका प्रयोग करने से मना करना चाहिए। इसके अलावा यदि आप इसके बारे में लोगों को जानकारी प्रदान करते हैं तो यह पॉलीथीन के उपयोग को रोकने का सबसे बड़ा फैसला होगा। जब आप बाजार में खरीदारी करने जाते हैं तो अपने साथ कपड़े से बना एक जूट या बैग लेकर जाना चाहिए और अगर दुकानदार पाली बैग देता है तो उसे लेने से इंकार कर देना चाहिए। ऐसा करने से पालीथीन की आवश्यकता दिन-प्रति दिन कम हो जाएगी और एक समय आएगा जब पर्यावरण से पॉलीथीन समाप्त हो जाएगा। सरकारी इकाई जो पॉलीथीन (Polyethylene) के निर्माण में चलती है उन इकाइयों को बंद करना होगा।
जो प्लास्टिक का निपटान किया जा सकता है, वह पुनर्नवीनीकरण भी किया जा सकता है और उनका उपयोग कई अलग-अलग तरीकों में जैसे बैग, पर्स, या पाउच को बनाने में किया जा सकता है। बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग उपलब्ध हैं, जो काफी हद तक मददगार साबित हुए हैं। प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए विभिन्न रणनीतियों की क्षमता का आकलन करने के लिए, शोधकर्ताओं ने इसके उत्पादन, उपयोग, पुनर्चक्रण और निपटान के माध्यम से प्लास्टिक के प्रवाह की गणना करने के लिए एक मॉडल विकसित किया। मॉडल पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे की मात्रा का अनुमान लगाता है और इसका उपयोग पांच परिदृश्यों के प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए किया गया। और हमेशा की तरह व्यापार; संग्रह और निपटान में सुधार; रीसाइक्लिंग बढ़ाना; प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और विकल्पों को प्रतिस्थापित करना; और प्रणाली परिवर्तन, जो इन सभी हस्तक्षेपों को एकीकृत करता है।
यह दर्शाता है कि 2040 तक वर्तमान प्रक्षेपवक्र की तुलना में सिस्टम परिवर्तन जलीय और स्थलीय प्लास्टिक प्रदूषण की वार्षिक दरों को लगभग 80% कम कर देगा। इस तरह के एक ओवरहाल से नए उत्पादित प्लास्टिक के उत्पादन और खपत में 55% की कटौती होगी। यदि निर्माता वैकल्पिक सामग्री, जैसे कागज और कम्पोस्टेबल सामग्री में स्थानांतरित हो जाते हैं, और यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पादों और पैकेजिंग को रीसाइक्लिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है, तो पुनर्नवीनीकरण योग्य प्लास्टिक की मात्रा न केवल बढ़ेगी, बल्कि मूल्य में भी वृद्धि होगी। प्लास्टिक के उपयोग में लगभग 80% की कमी को प्राप्त करने के लिए, वैश्विक पुनर्चक्रण क्षमता को दोगुना करने की आवश्यकता होगी,तथा मध्यम और निम्न-आय वाले देशों को अपशिष्ट संग्रह दरों का विस्तार करने की आवश्यकता होगी। केवल डाउनस्ट्रीम समाधानों (संग्रह और निपटान, या पुनर्चक्रण) पर केंद्रित रणनीतियाँ के द्वारा वार्षिक प्लास्टिक प्रदूषण दर (क्रमशः 56.1 % और 31.7% द्वारा 2040) तक सार्थक कमी ला सकती हैं,तथा इस समस्या को समाधान करने की कोशीश की जा रही हैं। इस बीच, अगर अपस्ट्रीम समाधानों (कम करें और स्थानापन्न)की बात करे तो केंद्रित रणनीतियां भी वार्षिक प्रदूषण दर में पूर्ण कमी नहीं लाती हैं अनुमान है की 2040 तक 55.6% तक कमी आ जायेगी। सिस्टम की इस परिवर्तन को लागू करने में लागत निषेधात्मक नहीं है। वास्तव में, प्लास्टिक उत्पादन में कमी, पुनर्चक्रण में वृद्धि और अन्य परिवर्तनों के कारण, शोधकर्ताओं का अनुमान है कि वैश्विक शुद्ध अपशिष्ट प्रबंधन लागत लगभग 18% कम होगी। पर्यावरण में लगभग सभी प्लास्टिक प्रदूषण के प्रवाह को खत्म करने के लिए नए व्यापार मॉडल और उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकियों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धताओं जैसे नवाचारों की आवश्यकता होगी। जिस विषय पर अभी नए नए शोध कार्य जारी है।
सिंगल यूज प्लास्टिक अभियान क्या है?| What is Single Use Plastic Campaign in hindi ?
भारत पूर्व से ही प्रकृति का पुजारी रहा है। और पर्यावरण को बचाने में हमेशा पर अपनी भूमिका अदा करते रहना चाहिए। इसीलिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 15 अगस्त 2019 को दिल्ली ‘लाल किले’ से भारत के सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वह ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ में अपना योगदान देकर आंदोलन को सफल बनाए और पर्यावरण को प्लास्टिक के प्रदूषण से मुक्त करने में अपना योगदान दें। ताकि भविष्य में पर्यावरण सुरक्षित रहे और पृथ्वी पर जीवन संभव रहे। सिंगल यूज प्लास्टिक का मतलब यह है, कि ‘प्लास्टिक के सामानों का उपयोग ना के बराबर’करना।
निष्कर्ष |conclusion
प्लास्टिक या पालीथीन बैग के बजाय पेपर या जुट बैग का उपयोग से धीरे-धीरे हमारी समस्या को कम किया जा सकता है और प्लास्टिक के प्रति हमारे आकर्षण को भी कम किया जा सकता हैं। इसलिए हमें छोटे-छोटे कदम उठाकर प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए योगदान देना चाहिए। इस समय कुछ निवारक कदम उठाने की आवश्यकता है।
प्लास्टिक एक तरह का सिंथेटिक पॉलीमर है। कई शताब्दियों से लोग प्लास्टिक का उपयोग।करते आ रहे है। अब वह समय आ गया है कि हम प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्णविराम लगाए और प्लास्टिक को हमे रीसायकल करने वाले संस्था या कंपनी को प्रोत्साहित करे। साथ ही हमे मिलकर एक साथ प्रदूषण पर अंकुश लगाने की हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए। प्लास्टिक प्रदूषण ने धरती को इस तरह से जकड़कर रख लिया है कि अगर आने वाले कुछ सालों में इसे कम करने की कोशिश नहीं की गई तो, प्लास्टिक का प्रदूषण मानव जाति का विनाश कर देगा। हम सभी अपने-अपने स्तर पर जितना हो सकता है प्लास्टिक के उपयोग को कम करें। प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए सरकार को भी सख्त कानून बनाने होंगे।
‘प्लास्टिक हटाना है,
पर्यावरण को सुरक्षित बनाना है।’

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