डॉलर पहुंचा पहली बार 90 पार पहुंचा , क्या बन सकता है 100 का रिकॉर्ड भारतीय रुपया की गिरावट ने बढ़ाई चिंता, जानिए क्यों हुआ ऐसा
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1 Dollar in rupees डॉलर पहुंचा पहली बार 90 पार पहुंचा |
1 Dollar in rupees डॉलर पहुंचा पहली बार 90 पार पहुंचा , क्या बन सकता है 100 का रिकॉर्ड भारतीय रुपया की गिरावट ने बढ़ाई चिंता, जानिए क्यों हुआ ऐसा
90Rupee in Dollar: आज भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत असर पड़ा है। आज भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के तुलना में 90 के पार पहुंच गया है । जो कि महंगाई और भी बढ़ने का संकेत मन जा सकता है। विदेशी निवेश का कमी, आयातकों की बढ़ती मांग और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अनिश्चितता से रुपये पर दबाव भरी दबाव पड़ रहा है। क्या आप जानते है क्यों लगातार गिर रहा है रुपया और इससे आगे क्या प्रभाव पड़ेगा। क्या महंगाई बढ़ेगी।
90Rupee in Dollar: भारतीय रुपया ने बुधवार को इतिहास के सबसे निचले स्तर पर गिरा है।, जब की यह पहली बार 90 के पार पहुँच गया। शेयर मार्केट के लगातार पाँचवें दिन रुपये में गिरावट होने से बाजार में बेचैनी और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस लेवल को RBI कई हफ्तों से बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आज यह “मनोवैज्ञानिक सपोर्ट” टूट गया।
रुपये की लगातार गिरावट के पीछे क्या कारण हैं?
भारतीय मुद्रा की कमजोरी होना शिर्फ वैश्विक स्थितियों का नतीजा नहीं है, बल्कि कई स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कारण एक साथ दबाव बना रहे हैं।जिसमें कुछ कारण यह भी है कि पिछले कुछ हफ्तों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजारों से तेज़ी से पूंजी निकाली है। जिससे अमेरिकी टैरिफ को लेकर असमंजस और वैश्विक अनिश्चितता की कारण से निवेशक जोखिम से बचने को सोच रहे हैं। कई कंपनियों सहित बड़े आयातकों ने लगातार डॉलर को खरीदा है जिससे रुपया पर भरी दबाव हुआ है । इस प्रकार से डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये को और भी नीचे धकेल दिया है।
भारत–अमेरिका व्यापार समझौता भी इसका प्रमुख कारण है।
भारत–अमेरिका देशों के बीच में व्यापार की समझौता अभी भी अनिश्चितता के रूप में है। जिससे नए टैरिफ लागू होने के डर से बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मुद्रा बाजार में ट्रेडर्स द्वारा भारी मात्रा में शॉर्ट पोजिशन ली गई थी, जिसने रुपया ओर भी नीचे चल गया। कैरी ट्रेड की आशंका से कई एशियाई करेंसीज़ दबाव में चल रहीं। इसका असर रुपये पर भी पड़ा है।ओर आज डॉलर ऊंचाई पर ओर रिया गहराई में पहुंचती जा रही है। लगता है अब ओ दिन दूर नहीं जब रुपया शतक को पार कर जाए।पिछले कुछ हफ्तों में रिजर्व बैंक ने कुछ हस्तक्षेप करने की कोशिश जरूर किया था, लेकिन आज जब 88.80 का महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर टूट गया तो बाजार को RBI की ओर से कोई बड़ी हस्तक्षेप सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI नियंत्रित तरीके से रुपये को नियंत्रित करना चाहता है।
बआदि सोचने वाली बात तो यह है कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99.22 पर थोड़ा कमजोर ही था।इसका मतलब है कि रुपये की गिरावट का मुख्य कारण घरेलू मांग और निवेश बाहर होना ही है। अंतरराष्ट्रीय माहौल थोड़ा सकारात्मक होते हुए भी भारतीय मुद्रा अपनी ही परिस्थितियों से डूबती चली जा रही है।
रुपये की गिरावट का असर तुरंत शेयर बाजार पर भी पड़ता हुआ दिखा। निफ्टी अपने रिकॉर्ड हाई से 300 अंक नीचे बंद हुआ।निवेशकों को डर है कि कमजोर मुद्रा से आयात लागत बढ़ेगी और कंपनियों की कमाई पर भी असर पड़ेगा।
MK ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 तक रुपये वैल्यू स्थिर 88 से 91 के बीच रहे तो स्थिति तभी बेहतर हो सकती है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तय हो जाए और टैरिफ भारत के सकारात्मक पक्ष में हों।


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